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वाराणसी में मोदी के कार्यक्रम में पत्रकारों पर लगे प्रतिबंध



वाराणसी। भाजपा की सरकार बनने के पहले जहां मीडियाकर्मियों को काफी तवज्जो दिया जाता था और लिफाफे की प्रथा हावी दिखाई देती थी। यह सिलसिला अभी तक चलता रहा लेकिन इस बार वाराणसी में आगमन के दौरान प्रधानमंत्री के डीएलडब्लू में होने वाले कार्यक्रम की कवरेज के लिए पत्रकारों के पास पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया। केवल फोटोग्राफरों को बुलाया गया वह भी केवल दीप प्रज्ज्वलन के समय  उद्घाटन के लिए। ऐसे में मीडिया कर्मियों के साथ इस तरह का सौतेला रवैया अपनाने के बाद जहां कुछ लोग इसे मीडिया विरोधी फैसला मान रहे हैं तो कुछ लोग चमचागिरी में लग कर बहुत अच्छा फैसला बता रहे हैं। लेकिन कल के समय में प्रधानमंत्री को अगर पांच बार छींक भी आती थी तो वह खबर हो जाती थी लेकिन अब संगठन का कार्यक्रम होने की बात कह कर जिस तरह से मीडिया कर्मियों के साथ सौतेला रवैया अपनाया गया है वह कितना सही है? यह भी विचार करने वाली बात है। बावजूद इसके कार्यक्रम के समय पत्रकार साथियों ने उनके घेरेबंदी से बाहर ही खड़े होकर रिपोर्टिंग करने का प्रयास किया लेकिन वहां भी उनको फोटो खींचने सहित रिपोर्टिंग करने से भी रोका गया। क्या इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक नहीं कही जा सकती? मीडिया कर्मियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना बीजेपी पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है साथ ही यह भी सवाल मन में पनप रहा है कि कहीं कुर्सियां खाली ही रह जाती और मीडिया कर्मी उसपर भड़ास निकाल देते जिसके चलते उनको वहां की रिपोर्टिंग करने से तो नहीं रोका गया।

बात कुछ भी हो लेकिन एक बात तो स्पष्ट है की इस तरह का फैसला किसी भी तरीके से उचित नहीं दिखाई दे रहा साथ ही यह अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाया जा रहा है क्योंकि कार्यक्रम में नहीं दिया जाना यह निर्धारित कर दिए, ठीक है। लेकिन पत्रकारों को बाहर भी खड़े नहीं होने देना कितना अच्छा है? कई पत्रकार साथियों ने यह भी बताया की डीएलडब्लू में भारी संख्या में कुर्सियां 11:30 बजे तक खाली ही पड़ी थी और यह लगता है की अंत तक कुर्सियां खाली ही रह जाएंगी।
अकेला हूँ के एफबी वाल से साभार



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