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शिव की नगरी काशी मे शिवपुर का इलाका उपेक्षा का है शिकार

शिवपुर स्थित रानी पोखरा

शिवपुर स्थित रानी पोखरे का अस्तित्व खतरे में

★दबंगों द्वारा पोखरे की ज़मीन को पाटकर बेच दी गई


वाराणसी। शिव की नगरी काशी मे स्थित शिवपुर की धरोहरों मे एक धरोहर रानी पोखरा भी  है ।अति प्राचीन यह पोखरा लगभग साढ़े बाईस विगहे मे फैला हुआ यह पोखरा आज अपनी बेवशी पर रो रहा है । प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र मे पंचकोशी -सुद्धीपुर  मार्ग पर स्थित यह पोखरा आज प्रशासन की लापरवाही का  शिकार है ।और धीरे धीरे  यह पोखरा अपने अस्तित्व को खोता जा रहा है । एक तरफ़ जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने तालाब ,नदी ,पोखरे ,कुआं आदि की सफाई कर उसे सुंदरीकरन करने का आदेश पारित किया है ,लेकिन प्रशासन द्वारा इसे गम्भीरता से नही लिया गया है ।आज इस पोखरे की हालत यह है की इसपर जलकुम्भी ने अपना कब्जा कर लिया है ।सिर्फ इतना ही नही इस पोखरे के आस पास की ज़मीन को दबंगों द्वारा कब्जा कर उसे बेच दिया गया है , यह पोखरा राजा मोती चंद ने बनवाया था लेकिन धीरे धीरे पोखरे को पाटकर दबंगों द्वारा इसके अस्तित्व को ख़त्म करने का प्रयास जारी है । इस तरह शिवपुर मे दर्जनों पोखरे व तालाब है जो दवंगो और प्रशासनिक अधिकारियों की मिली भगत से कई पोखरे के अस्तित्व को ख़त्म कर दिया गया है । चाहे वह कादीपुर की पोखरी हो या सुद्धीपुर की पोखरी हो ।आज कमिश्नर रमेश नीतिन गोकर्ण ने सख्त क़दम उठाये



है ,देखना यह है की उनके इस क़दम से कितने पोखरों का उद्धार होता है । ऐसे तो शिवपुर पंचकोशी यात्रा का चौथा पड़ाव है ,लाखों श्रधालु अपने पंचकोशी यात्रा के दौरान यहाँ एक दिन विश्राम करते है ,लेकिन उनके आगे कई परेशानियां होती है ,यहाँ पर यात्रियों के रुकने के लिये सही धर्मशाला नही है जहाँ पर यात्रियों को नहाने की सुविधा हो ,पीने की पानी की सुविधा हो , न ही उनके रुकने की उचित सुविधा है न ही सही मार्ग है । जहाँ पूरे  शहर मे विकास के लिये कार्य हो रहा है वही शिवपुर मे विकास शून्य है ।


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